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कथाओं के अनुसार लोग कहते हैं? सन् 1853 की बात है। अंग्रेज़ सरकार ने काशी में अपना नियंत्रण मज़बूत करने के लिए एक नया अधिकारी कर्नल रिचर्ड विल्सन को भेजा!


अंग्रेज़ सरकार ने काशी में अपना नियंत्रण मज़बूत करने के लिए एक नया अधिकारी भेजा कर्नल रिचर्ड विल्सन। वह अनुशासनप्रिय था, कठोर था, पर उससे भी अधिक अहंकारी। उसे भारतीय परंपराओं से चिढ़ थी। वह अक्सर मंदिरों और साधुओं पर हँसता, कहता है।



“ये सब अंधविश्वास हैं… ईश्वर नहीं, केवल नियम चलते हैं।”

एक दिन उसने आदेश जारी किया, “काशी में कोई भी मंदिर रात में आरती नहीं करेगा। हमारे सैनिकों को नींद में खलल पड़ता है।”


पूरा शहर सन्न रह गया। संतों ने विनम्रता से समझाया “महाराज, यह आरती कालभैरव की है, उसे रोकना काल का अपमान है।” विल्सन हँस पड़ा “देखते हैं, तुम्हारा ‘काल’ क्या कर लेता है।” उसी रात उसने अपने गार्डों को आदेश दिया “चलो, देखते हैं इस तथाकथित कालभैरव का चमत्कार।”


मध्यरात्रि का समय था। गंगा किनारे ठंडी हवा बह रही थी। चारों ओर सन्नाटा, केवल शंख की मंद ध्वनि गूँज रही थी। विल्सन जैसे ही कालभैरव मंदिर के द्वार में दाखिल हुआ, दीपक एक-एक कर बुझने लगे। वातावरण में गंधक की गंध भर गई। उसका घोड़ा ज़ोर से हिनहिनाया और भाग गया। 


विल्सन ने घबराकर कहा “अगर तेरे में शक्ति है… तो सामने आ!” क्षण भर में जैसे समय थम गया। हवा रुक गई। पेड़ स्थिर हो गए। दीपक की लौ ठिठक गई। और तभी… एक गूंजता स्वर मंदिर की दीवारों से टकराया 


“जो काल को चुनौती देता है, वह काल में ही बंध जाता है।”

सुबह हुई। सैनिक मंदिर पहुँचे तो उन्होंने एक भयावह दृश्य देखा। कर्नल विल्सन मंदिर के द्वार पर खड़ा था, पर जड़वत्, जैसे समय में जकड़ा हुआ हो। आँखें खुली थीं, पर उनमें जीवन नहीं। उसकी जेब में रखी घड़ी की सुइयाँ ठीक 12:00 पर थमी हुई थीं। तीन दिन तक वह उसी अवस्था में रहा। फिर अचानक उसकी उँगलियाँ हिलीं, होंठ कांपे। धीरे-धीरे उसने आँखें झपकाईं और कहा


“मैंने उसे देखा… समय चलता नहीं, वह स्वयं चलता है।”

कुछ ही दिनों में उसने काशी छोड़ दी। लोग कहते हैं, वह इंग्लैंड लौट गया और जीवनभर मंदिरों से दूरी बनाए रखी। उसकी डायरी में मिला अंतिम वाक्य ....


“I saw Time in human form… and I shall never mock faith again.


कालभैरव भय नहीं, न्याय का प्रतीक हैं। वे समय के रक्षक हैं, जो धर्म का सम्मान करता है, उसका समय स्वयं उसका साथी बन जाता है। पर जो उसे चुनौती देता है वह समय के चक्र में बंध जाता है।

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