🌼🌿।। कुलदेवी स्तोत्र ।।🌿🌼
कुलदेवी स्तोत्र पाठ से परिवार की रक्षा, सुख-समृद्धि, मानसिक शांति, और आध्यात्मिक उन्नति होती है, यह परिवार पर आने वाली बाधाओं को दूर करता है, संतान को संस्कारी बनाता है, और जीवन में साहस व सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जिससे सभी रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं और वंश आगे बढ़ता है.
कुलदेवी स्तोत्र पाठ के मुख्य लाभ (Benefits of Kuldevi Stotra Path):
पारिवारिक सुरक्षा: देवी की कृपा से परिवार पर कोई संकट नहीं आता और हर विपदा से रक्षा होती है.
धन-धान्य और समृद्धि: घर में धन-संपत्ति की कमी नहीं होती और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है.
मानसिक शांति और संतुलन: मन शांत रहता है, तनाव कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा आती है.
वंश वृद्धि और संतान लाभ: परिवार का वंश आगे बढ़ता है और संस्कारी व चरित्रवान संतान प्राप्त होती है.
बाधाओं का निवारण: अदृश्य बाधाएं और रुके हुए काम आसानी से पूरे होने लगते हैं.
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य: परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य लाभ मिलता है और बीमारियाँ दूर होती हैं (यदि कुलदेवी अप्रसन्न हों तो बीमारियाँ बढ़ती हैं).
साहस और शक्ति संचार: जीवन के संघर्षों का सामना करने का साहस मिलता है और शक्ति का संचार होता है.
आध्यात्मिक उन्नति: व्यक्ति को सही दिशा मिलती है और आध्यात्मिक विकास होता है.
पाठ कैसे करें (How to perform the Stotra Path):
समय: शुक्रवार, नवरात्रि, अमावस्या, या पूर्णिमा के दिन विशेष फलदायी होते हैं.
स्थान: घर के पूजाघर या कुलदेवी के मंदिर में.
विधि: शुद्ध मन से दीपक जलाकर, "ॐ नमः कुलदेव्यै नमः" से आरंभ करें और पाठ के बाद क्षमा याचना करें, फिर आरती करें.
संकल्प: पाठ से पहले 'कुलदेवी स्तोत्र पाठं करिष्ये' बोलकर संकल्प लें.
कुलदेवी की कृपा परिवार की उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, और स्तोत्र पाठ इसका एक शक्तिशाली माध्यम है.
। कुलदेवी स्तोत्र ।
नमस्ते श्री शिवाय कुलाराध्या कुलेश्वरी। कुलसंरक्षणी माता कौलिक ज्ञान प्रकाशीनी।।1।।
वन्दे श्री कुल पूज्या त्वाम् कुलाम्बा कुलरक्षिणी। वेदमाता जगन्माता लोक माता हितैषिणी।2।।
आदि शक्ति समुद्भूता त्वया ही कुल स्वामिनी। विश्ववंद्यां महाघोरां त्राहिमाम् शरणागत:।3।।
त्रैलोक्य ह्रदयं शोभे देवी त्वं परमेश्वरी। भक्तानुग्रह कारिणी कुलदेवी नमोस्तुते।।4।।
महादेव प्रियंकरी बालानां हितकारिणी। कुलवृद्धि करी माता त्राहिमाम् शरणागतम्।।5।।
चिदग्निमण्डल संभुता राज्य वैभव कारिणी। प्रकटीतां सुरेशानी वन्दे त्वां "कुल गौरवाम्"।।6।।
त्वदीये कुले जात: त्वामेव शरणम गत:! त्वत वत्सलोहं आद्ये त्वं रक्ष रक्षाधुना।।7।।
पुत्रं देहि धनं देहि साम्राज्यं प्रदेहि मे| सर्वदास्माकं कुले भूयात मंगलानु शाशनम ।।8।।
कुलाष्टकमिदं पुण्यं नित्यं य: सुकृति पठेत। तस्य वृद्धि कुले जात: प्रसन्ना कुलेश्वरी।।9।।
कुलदेवी स्त्रोत्मिदम, सूपुण्यं ललितं तथा | अर्पयामी भवत भक्त्या, त्राहिमां शिव गेहिनी ||10।।
।। श्री कुलदेव्यार्पणमस्तु ।।
❗जय महादेव❗

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