जीवन में हर व्यक्ति किसी न किसी ऋण से ग्रस्त रहता है तथा इससे बेहद मानसिक कष्ट होता है। ऋण दो तरह के होते हैं- प्रत्यक्ष ऋण और अप्रत्यक्ष ऋण, प्रत्यक्ष ऋण भौतिक जगत से संबंधित हैं तो अप्रत्यक्ष ऋण अध्यात्मिक जगत से संबंधित हैं किसी भी तरह के ऋण से राहत के लिए ऋण मुक्ति श्रीगणेश स्तोत्रम् सर्वोत्तम है।
ऋण के कई कारण होते हैं, लेकिन छोटे-छोटे बहुत से ऋण बुध ग्रह के कारण हो सकते हैं, इनसे मुक्ति के लिए बुधवार से ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्रम् का पाठ प्रारम्भ करें, एवं श्रीगणेश से ऋणमुक्ति की प्रार्थना करें। ध्यान रहे गुरु पूजन एवं एक माला गुरू मंत्र का जाप पहले अवश्य कर लें।
ऋणमुक्ति श्रीगणेश स्तोत्रम्
श्रीगणेश पंचोपचार विधि से पूजन करके गणेशजी को दूर्वा और लड्डू का भोग अर्पित करके, धूप दीप आदि जलाकर, शान्त मन से इस स्तोत्र का पाठ करें।
विनियोग-
ऊँ अस्य श्री ऋणविमोचन महा गणपति- स्तोत्र मन्त्रस्य शुक्राचार्य ऋषि:, ऋण विमोचन महागणपति र्देवता, अनुष्टुप् छन्द:, ऋण विमोचन महागणपतिप्रीत्यर्थे जपे विनियोग:।
* स्तोत्र पाठ *
ऊँ स्मरामि देवदेवेशं वक्रतुण्डं महाबलम्।
षडक्षरं कृपासिन्धुं नमामि ऋणमुक्तये।।१।।
महागणपतिं वन्दे महासेतुं महाबलम्।
एकमेवाद्वितीयं तु नमामि ऋणमुक्तये।।२।।
एकाक्षरं त्वेकदन्तमेकं ब्रह्म सनातनम्।
महाविघ्नहरं देवं नमामि ऋणमुक्तये।।३।।
शुक्लाम्बरं शुक्लवर्णं शुक्लगन्धानुलेपनम्।
सर्वशुक्लमयं देवं नमामि ऋणमुक्तये।।४।।
रक्ताम्बरं रक्तवर्णं रक्तगन्धानुलेपनम्।
रक्तपुष्पै: पूज्यमानं नमामि ऋणमुक्तये।।५।।
कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णं कृष्णगन्धानुलेपनम्।
कृष्णयज्ञोपवीतं च नमामि ऋणमुक्तये।।६।।
पीताम्बरं पीतवर्ण पीतगन्धानुलेपनम्।
पीतपुष्पै: पूज्यमानं नमामि ऋणमुक्तये।।७।।
सर्वात्मकं सर्ववर्णं सर्वगन्धानुलेपनम्।
सर्वपुष्पै: पूज्यमानं नमामि ऋणमुक्तये।।८।।
एतद् ऋणहरं स्तोत्रं त्रिसन्ध्यं य : पठेन्नर:।
षण्मासाभ्यन्तरे तस्य ऋणच्छेदो न संशय:।।९।।
सहस्रदशकं कृत्वा ऋणमुक्तो धनी भवेत्।।१०।।
।। इति रुद्रयामले ऋणमुक्ति श्रीगणेशस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ।।
*🙏श्रीगणेशाय नमः🙏*
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