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एक बार एक भक्त ने कथा करवाई...


एक बार एक भक्त ने कथा करवाई, कथा में उसका दोस्त भी आया जिसकी भजन वगैरह में कोई रूचि नहीं थी, मंच पर जो संत कथा करने आये थे उनसे उस मित्र को मिलवाने आयोजक ले गया। संत तो चेहरा देखते ही पहचान जाते हैं कौन कितना भजनानंदी है, उन्होंने उस आयोजक के मित्र का चेहरा देखकर बोला, आप थोड़ा भजन किया करो, वो मित्र बोला , महाराज भजन के लिए समय नहीं है, आज अपने मित्र के कहने से सिर्फ पाँच मिनट के लिए आया हूँ वरना मेरे व्यापार से मुझे समय नहीं मिलता, वो संत बोले अगर तुम प्रतिदिन पाँच मिनट भी भजन करो तो तुम्हारा व्यापार दस गुना तेजी से आगे बढ़ेगा, अब व्यापारी को तो व्यापार बढ़ाने के तरीके ही चाहिए उसने उनसे पूछा सिर्फ पाँच मिनट 

संत बोले हाँ - उसने पूछा कब करूँ, संत बोले जब तुमको समय मिले।

फिर उस मित्र ने पांच मिनट भजन शुरू कर दिया , मगर वो करता तब ही जब वो सुबह वाशरूम में होता।

एक दिन सुबह वो रामजी का भजन गा रहा था , वो भजन हनुमान जी के कानों में पड़ा, उन्होंने श्रद्धा भाव से राम जी से प्रार्थना की हे प्रभु ये भजन जहाँ भी चल रहा हो वहाँ मुझे पहुँचा दीजिये, हनुमान जी उस आदमी के वाशरूम में प्रकट हो गए, जैसे ही उस आदमी को हनुमान जी ने उस अवस्था में भजन करते हुए देखा, हनुमान जी महाराज क्रोधित हो गए बोले, मुर्ख तुझे यही जगह मिली थी भजन करने को और उन्होंने उस आदमी की पीठ पर हल्का सा प्रहार किया जिससे उस आदमी को थोड़ी सी पीड़ा पहुँचे और हनुमान जी सीधे वहां से राम जी के पास निकले।

हनुमान जी राम जी के पास उपस्थित हुए सारा मामला बताने को किन्तु उन्होंने देखा राम जी उदास बैठे हैं, वो बोले प्रभु क्या बात है आज आप उदास क्यों बैठे हैं? राम जी ने कहा कुछ नहीं वो ज़रा मेरी पीठ में दर्द है, तुम बताओ तुम्हारा आना कैसे हुआ? अब राम जी को पीड़ा हो और हनुमान जी अनदेखा कर दें ऐसा हो ही नहीं सकता, हनुमान जी ज़िद पर अड़ गए कि कहाँ दर्द हो रहा है? प्रभु पहले तो न नुकुर करते रहे मगर अंततः उन्होंने हनुमान जी को अपनी पीठ दिखाई, हनुमानजी आशचर्य में पड़ गए, उन्होंने देखा वहाँ किसी वानर के पंजे की छाप लगी हुई थी, उनको क्रोध आ गया वो बोले किस वानर की इतनी हिम्मत हुई कि मेरे होते हुए मेरे स्वामी को छू ले, 

उन्होंने राम जी से पूछा… 

राम जी ने मना कर दिया बोले, अरे जाने दो , मगर बजरंग बली ने एक भी न सुनी और उन्होंने विश्व के सभी वानरों को बुलाया और पूछा किसने किया यह कार्य? सभी वानर काँप गए , बोले हम कैसे कर सकते हैं यह काम, तो हनुमानजी ने सभी वानरों का पंजा एक एक कर के राम जी की पीठ पर पड़ी छाप से मिलाया, मगर किसी का पंजा नहीं मिला… उन्होने पूछा प्रभु बताइये न किसने किया ये काम? इनमे से तो कोई नहीं था!


प्रभु ने कहा , हनुमान क्या तुमने अपने पंजे का छाप का मिलान किया? हनुमान जी बोले प्रभु आपको लगता है कि मैं ये काम कर सकता हूँ? फिर भी आप कहते हैं तो मैं मिलान करता हूँ, जैसे ही हनुमान जी ने प्रभु के पीठ पर पड़ी छाप से अपने पंजे का मिलान किया, हनुमान जी राम जी के चरणों में गिर पड़े बोले प्रभु ये अपराध मुझसे कैसे हो गया? तब राम जी ने कहा कि हनुमान तुमने जिसको भजन करते हुए मारा वो मेरा ही नाम ले रहा था और जो भक्त मेरा स्मरण करता है उसकी सारी पीड़ा मैं अपने ऊपर ले लेता हूँ।

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