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लोहड़ी और मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का महत्व.....

लोहड़ी (13 जनवरी) और मकर संक्रांति (14 जनवरी) सर्दियों की फसल, सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश और सांस्कृतिक आध्यात्मिक संदेशों का प्रतीक हैं। इन अवसरों पर तिल और गुड़ का विशेष महत्व होता है।


1️⃣ ऋतु और कृषि का महत्व

ये त्योहार सर्दियों की फसल और सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश का प्रतीक हैं। तिल, गुड़ और अन्य फसलें इस समय संग्रहित और तैयार रहती हैं। सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश से दिन लंबे और मौसम हल्का होता है।

प्रत्येक वर्ष जनवरी माह में सबसे पहला त्यौहार मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जाता है | इस त्यौहार को पूरे देश के विभिन्न प्रान्तों में भिन्न-भिन्न नामों से मनाने का प्रयास किया जाता है |

माघ मास में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर होती है..मकर संक्रान्ति | इस दिन से ही सूर्य का उत्तरायण होना या गमन करना माना जाता है | इस दिन सूर्य, पवित्र नदियों में स्नान, दान, तिल गुड़ आदि का बड़ा ही महत्त्व है | कह सकते हैं कि मुख्य रूप से त्यौहार तो एक ही है उद्देश्य भी एक ही है किन्तु जिस तरह से हमारा देश रंग, रूप ,वेश भाषा, खानपान में भिन्नता रखता है उसी प्रकार से प्रान्तीय आधार पर त्योहारों को मनाने में भी थोड़ी- बहुत भिन्नता रखने के साथ ही उनके नाम में भी भिन्नता रखता है |

त्योहार एक नाम अनेक

👉सर्वप्रमुख मकर संक्रान्ति

देशभर में मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाएगा। सनातन धर्म में मकर संक्रांति के त्योहार को देश के अलग-अलग भागों में दूसरे नामों के साथ मनाया जाता है। दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाड़ू में मकर संक्रांति को पोंगल, गुजरात में उत्तरायण, पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति, उत्तर प्रदेश, बिहार,मध्य प्रदेष और झारखंड में खिचड़ी, असम में बिहू और राजस्थान में मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। तमिलनाड़ू में पोंगल का त्योहार राज्य का प्रमुख त्योहार माना जाता है। पोंगल का त्योहार दीपावली के तरह ही खास और चार दिनों तक मनाया जाता है। पोंगल के त्योहार की तैयारियां बहुत दिनों पहले से ही की जाती है। यहां पर पोंगल के पहले घरों की साफ-सफाई और सजावट होती है। नई फसलों को सूर्यदेव और इंद्रदेव को समर्पित करना, खेती-किसानी में काम आने वाले गाय बैलों और औजारों को पूजा विशेष रूप से की जाती है। इसके बाद सभी लोग मिलकर ईश्वर और प्रकृति का धन्यवाद देते हुए एक-दूसरे को पोंगल की शुभकामनाएं देते हैं।[1]



पञ्जाब और हरियाणा में लोहड़ी

इस त्योहार को मनाने का मुख्य कारण भारत के विभिन्न हिस्सों में फसल के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है | जो पूरे देश में भव्य समारोह के रूप में मनाया जाता है। पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी के त्योहार के उत्सव के द्वारा फसल के मौसम की शुरुआत को चिह्नित करने के लिए की यह एक सदियों पुरानी परंपरा है |



अग्नि के आसपास उसत्व

लोहड़ी की संध्या (मकर संक्रांति की पूर्व संध्या ) को लोग लकड़ी जलाकर अग्नि के चारों ओर चक्कर काटते हुए नाचते-गाते हैं और आग में रेवड़ी, मूंगफली, खील, मक्की के दानों की आहुति देते हैं। अग्नि की परिक्रमा करते और आग के चारों ओर बैठकर लोग आग सेंकते हैं। इस दौरान रेवड़ी, खील, गज्जक, मक्का खाने का आनंद लेते हैं।


विशेष पकवान

* लोहड़ी के दिन विशेष पकवान बनते हैं जिसमें गजक, रेवड़ी, मुंगफली, तिल-गुड़ के लड्डू, मक्का की रोटी और सरसों का साग प्रमुख होते हैं। लोहड़ी से कुछ दिन पहले से ही छोटे बच्चे लोहड़ी के गीत गाकर लोहड़ी हेतु लकड़ियां, मेवे, रेवडियां, मूंगफली इकट्ठा करने लग जाते हैं।



तमिलनाडु में पोंगल

चार दिनों के त्योहार के अनुसार पहले दिन को भोगी पोंगल कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह त्योहार भगवान इंद्र के सम्मान में आयोजित किया जाता है, क्योंकि इंद्र के बिना बारिश संभव नहीं है और न ही कृषि संभव है। ऐसी मान्यता है कि जाड़े का मौसम समाप्त होने के बाद विशाल अलावकर उस पर परिवार की पुरानी अनुपयोगी चीजें जिसमें अन्य लड़कियां होती हैं, उस पुरुष के चारों ओर नाचती-गाती होती हैं।



असम में माघ बिहू

भोगाली या माघ बिहू के पहले दिन को उरुका कहते हैं। इस दिन लोग खुली जगह में धान की पुआल से अस्थायी छावनी बनाते हैं जिसे भेलाघर कहते हैं। इस छावनी के पास ही 4 बांस लगाकर उस पर पुआल एवं लकड़ी से ऊंचे गुम्बज जैसे का निर्माण करते हैं जिसे मेजी कहते हैं। गांव के सभी लोग यहां रात्रिभोज करते हैं।



गुजरात में उत्तरायण

जब भी हम बात मकर संक्रांति की करते हैं तो दिमाग में सबसे पहले नाम गुजरात का आता है, यहां मकर संक्रांति के दिन अलग ही रौनक देखने को मिलती है। गुजरात में मकर संक्रांति का त्योहार उत्तरायण के नाम से जाना जाता है और इस दिन पतंगबाजी का बहुत महत्व है। पूरे विश्व में गुजरात की पतंगबाजी प्रसिद्ध है। इस दिन पूरा आसमान रंग बिरंगी पतंगों से सज रहता है। हर कोई पतंग के माध्यम से अपनी प्रार्थना अपने ईश के पास भेजता है।



इस पर्व के दौरान सबसे अच्छे पतंग उड़ाने वाले अपने पतंग उड़ाने का हुनर दिखाते हैं। पूरे आकाश में कई डिजाइनों और आकृतियों के पतंग के साथ रंगीन हो जाता है। सबसे रोमांच क्षण आता है, जब पेंच लड़ाया जाता है,जिसमे लोग एक दूसरे की पतंग से पेंच लड़ाकर उसे काटने का प्रयास करते हैं। इस त्योहार पर पतंग उड़ाने की प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाता है।


आप सभी पाठकों को मकर संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएँ!!🙏🙏

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