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एक शक्ति दूसरी शक्ति का बंधन कैसे करती हैँ??...

प्रश्न  - एक शक्ति दूसरी शक्ति का बंधन कैसे करती हैँ??

उत्तर  - "भैरव जी ने हनुमान जी को बंद दिया" "काली जी ने भैरू जी को बंद दिया" "किसी ने तांत्रिक प्रयोग करके घर की रक्षक शक्ति को बंद कर दिया"



ये बातें अक्सर गाँव-देहात की चौकियों और भगत वालों के यहाँ सुनने को मिलती हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर यह कैसे संभव है? क्या कोई शक्ति किसी दूसरी शक्ति को सच में बंद कर सकती है? या यह महज अंधविश्वास है? आइए इस विषय को पौराणिक संदर्भों और तांत्रिक सिद्धांतों के आधार पर समझते हैं।


🔍 अवधारणा स्पष्टीकरण - ग्रामीण क्षेत्रों में जितने भी लोक देवता, वीर, योगिनियां पूजी जाती हैं - बाबा रामदेव हों, 52 वीर हों या फिर हनुमान जी के विभिन्न स्वरूप - ये सभी किसी न किसी महाशक्ति के अधीन कार्य करते हैं। जैसे बाबा रामदेव की आराध्य शक्ति बाबा गोरखनाथ हैं। हनुमान जी के आराध्य श्री राम हैं। भैरव जी के आराध्य काली जी और महादेव हैं। जब किसी शक्ति को बांधना होता है, तो साधक उस शक्ति के आराध्य देव की शपथ (दोहाई) देता है। यह शपथ इतनी प्रबल होती है कि वह शक्ति अपने आराध्य के वचन का सम्मान करते हुए बंधन स्वीकार कर लेती है। यह कमजोरी नहीं, बल्कि मर्यादा का प्रश्न है।


📜 पौराणिक उदाहरण - रावणपुत्र मेघनाथ (इंद्रजीत) ने इंद्रदेव, वरुण आदि देवताओं को युद्ध में बंद कर दिया था। इसी कारण उनका नाम इंद्रजीत पड़ा। लंका युद्ध में इंद्रजीत ने हनुमान जी पर ब्रह्मास्त्र चलाया। हनुमान जी उससे बंध गए। हालांकि हनुमान जी में उस बंधन को तोड़ने की पूरी क्षमता थी, लेकिन उन्होंने ब्रह्मास्त्र की मर्यादा रखते हुए स्वयं को बंधन में रहने दिया।


व्यावहारिक पहलू - तांत्रिक प्रयोगों में यह सिद्धांत आज भी जीवित है: हनुमान जी को बांधना हो तो राम जी की शपथ दी जाती है। भैरव जी को बांधना हो तो काली जी या महादेव की शपथ दी जाती है।

कामाख्या क्षेत्र की योगिनियों को बांधना हो तो भगवती कामाख्या और उमानंद भैरव की दोहाई दी जाती है। हनुमान जी के पंचमुखी स्वरूप (मसानी हनुमान) में अपार शक्ति है। वे प्रेत-पिशाचों पर विराजमान हैं। यहां सबसे महत्वपूर्ण है साधक का स्वयं का तपोबल। उसने कितनी सिद्धियां अर्जित की हैं, उसके आराध्य कौन हैं - यही निर्धारित करता है कि उसका प्रयोग कितना प्रभावी होगा।

चेतावनी: जो साधक आज दूसरे की शक्ति को बांध रहा है, कालांतर में वह स्वयं भी इसी प्रकार के प्रयोग का शिकार हो सकता है। यह दोधारी तलवार है। इसलिए किसी भी शक्ति को अनावश्यक रूप से बंधन में नहीं डालना चाहिए।

🔱 निष्कर्ष - यह विषय न तो पूरी तरह से अंधविश्वास है और न ही कपोल कल्पना। यह तंत्र विद्या, मंत्र शास्त्र और लोक आस्था का गहरा अंग है। जो लोग इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, वे इसकी सच्चाई को भली-भांति जानते हैं। आपको यह जानकारी कैसी लगी? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



Comment मे लिखिए __भगवान हनुमान हर बंधन से मुक्ति दे दो 

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